Thursday, 15 September 2016

यदि दुखों से बचना चाहते हो तो...

अक्सर हम लोग कहते हैं जीवन मुसीबतों से भरा है  , और ये भी सत्य है  कि  मुसीबत हमें कभी अच्छी  नहीं लगती, नतीजा क्या होता है  मुसीबतों से भागना, जी हाँ   नतीजा होता है  मुसीबतों से भागना  , हम मुसीबत को हल करने की बजाय भाग खड़े होते हैं .

हमें लगता है कि ऐसा करतने से हम बच सकते  हैं  जबकि वास्तविक्ता तो ये है कि  मुसीबतों से दूर भागने से मुसीबतें तो वहीँ रहती हैं, जबकि, उन्हें हल न करके, उन्हें दूर न करके, हम जो समय भागने में  लगातें हैं, वो हमारे जीवन का अमूल्य समय होता है, जो व्यर्थ चला जाता ही  और मुसीबत को दूर न करके हम मुसीबत से हो रहे नुक्सान पर ध्यान न देकर , अपनी मुसीबत को और बढ़ लेते हैं. ये सिलसिला कभी ख़त्म नहीं होता , एक के बाद एक मुसीबत आती है फिर, जिससे जीवन दुखों से भर जाता है  यदि दुखों से बचना चाहते हो तो मुसीबतों का सामना करो. डटे रहो. 

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