Friday, 16 September 2016

लखपति बनने का तरीका ...

एक आदमी जीवन की परेशानियो से इतना दुखी हुआ कि उसने आत्महत्या करने की ठान ली ,इस इरादे से जब वो नदी में  डूबने गया तो वहां एक साधु ने उसका इरादा भांप लिया और पूछा" क्या करने जा रहे हो,..?
'मैं मरना चाहता हूँ..' आदमी ने उत्तर दिया 
'क्यों मरना चाहते हो ? ' साधु ने पूछा तो वह आदमी बोला' "महाराज मेरे पास पैसे नहीं नहीं?और कोई मेरी मदद नहीं करता  ":
साधु ने कहा "बोलो तुम्हें कितने पैसे चाहिए?' मैं तुम्हारी मदद  करूँगा।

आदमी ने साधु की बात सुनी , पहले तो उसे यकीन  नहीं हुआ, फिर देखा की साधु गंभीर है  तो वह आदमी बोला " क्या तुम मुझे उतने पैसे दे सकते हो जितने  मैं माँगू."
 साधु ने कहा" हाँ दे सकता हूँ, बोलो तुम्हें कितने पैसे चाहिए ?"
"क्या आप मुझे एक लाख रूपये दे सकते हो? " आदमी ने पूछा 
"बस एक लाख चाहिए? दूंगा, लेकिन इसके बदले तुम्हें भी मेरी एक मांग  पूरी करनी पड़ेंगी "साधु बोला।

" कैसी मांग?"आदमी ने पूछा तो साधु ने कहा कि  तुम मुझे एक हजार रूपये कमा  कर दो, तो मैं तुम्हें एक लाख दे दूंगा , "
 एक लाख पाने के लालच में आदमी ने साधु की बात मान ली और एक हजार रूपये कमाने का तरीका सोचने लगा, 

वह जो भी काम सोचता, उसे लगता ये काम तो निचले स्तर  का है, मैं इसे क्यों करूं?, 
आखिर में उसने स्टेशन पर मजदूरी करने का मन बना लिया फिर वह दिन रात कुलीगिरी करता रहा, थोड़े दिनों में एक हजार जमा होते ही वह साधु के पास पहुंचा , तो साधु वहां से जा चूका था , आदमी  बड़ा दुखी हुआ, उसे लगा कि एक लाख रूपये मारे गए. साधु ने उसे धोखा दिया। 

वह दुखी मन से वहां से चल पड़ा. एक हजार रूपये उसकी जेब में थे, जो उसने कमाए थे. उस पैसे से उसने पान बीड़ी का धंधा  कर लिया।  साल दो साल में  ही उसका काम चल निकला ।  धीरे धीरे वो लखपति बन गया।  

आदमी को जब  भी उस साधु की याद आती वह सोच में  पड जाता कि  क्या वाकई साधु ने उसे धोखा दिया या, काम करके लखपति बनने का तरीका सिखाया  ?
कहानी - प्रभुदयाल खट्टर 

Thursday, 15 September 2016

यदि दुखों से बचना चाहते हो तो...

अक्सर हम लोग कहते हैं जीवन मुसीबतों से भरा है  , और ये भी सत्य है  कि  मुसीबत हमें कभी अच्छी  नहीं लगती, नतीजा क्या होता है  मुसीबतों से भागना, जी हाँ   नतीजा होता है  मुसीबतों से भागना  , हम मुसीबत को हल करने की बजाय भाग खड़े होते हैं .

हमें लगता है कि ऐसा करतने से हम बच सकते  हैं  जबकि वास्तविक्ता तो ये है कि  मुसीबतों से दूर भागने से मुसीबतें तो वहीँ रहती हैं, जबकि, उन्हें हल न करके, उन्हें दूर न करके, हम जो समय भागने में  लगातें हैं, वो हमारे जीवन का अमूल्य समय होता है, जो व्यर्थ चला जाता ही  और मुसीबत को दूर न करके हम मुसीबत से हो रहे नुक्सान पर ध्यान न देकर , अपनी मुसीबत को और बढ़ लेते हैं. ये सिलसिला कभी ख़त्म नहीं होता , एक के बाद एक मुसीबत आती है फिर, जिससे जीवन दुखों से भर जाता है  यदि दुखों से बचना चाहते हो तो मुसीबतों का सामना करो. डटे रहो. 

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